पीली छतरी वाली लड़की- उदय प्रकाश
उदय प्रकाश हिंदी
के प्रसिद्ध समकालीन कथाकार हैं। उनकी कहानियाँ, कहानी के परम्परागत ढाँचे को तोड़ती
हैं। साथ ही पाठकों को नई अध्ययन दृष्टि देती हैं। इन्हें हिंदी में जादुई यथार्थवाद
स्थापित करने का श्रेय भी दिया जाता है। ‘तिरिछ’ कहानी इसका सर्वश्रेष्ठ उदहारण है। उदय प्रकाश आधुनिक युग के महत्वपूर्ण लेखक इसीलिए
भी हैं, क्योंकि वह अपनी कहानी में समकालीन राष्ट्रीय व सामाजिक संकट पर भी बात करते
हैं। 'पीली छतरी वाली लड़की’ जिसे उदय प्रकाश ने उपन्यास न मानकर एक लम्बी कहानी कहा
है, इसमें भी वह समकालीन राष्ट्रीय व सामाजिक स्थितियों के बारे में बात करते हैं।
किताब के शीर्षक से लगता है कि यह सिर्फ़ एक
प्रेम कहानी है, लेकिन किताब पढ़ने पर यह ‘सिर्फ़’ ‘भी’ में बदल जाता है। कहानी के नायक और नायिका का नाम जितनी फिल्मी है उतनी यह कहानी नहीं। यह प्रेम कहानी
एक आम कॉलेज की प्रेम कहानी की तरह है, लेकिन इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण वह विचार और आत्मचिन्तन
है जो लेखक ने नायक के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उदय प्रकाश ने कहानी में शिक्षण
संस्थानों में राजनीति, राष्ट्रीयता, हॉस्टल का जीवन, सामाजिक स्थिति, ब्राह्मणवाद
जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को उठाया है। साथ ही राहुल और अंजलि की प्रेम कहानी भी कथानक
का हिस्सा है। कहानी का अन्त सुखांत है, लेकिन लेखक ने सुखांत के माध्यम से आदर्श स्थिति
प्रस्तुत नहीं की है बल्कि समकालीन यथार्थ को सामने परोस दिया है, जो पाठक को सोचने
पर मजबूर करता है।
मध्य प्रदेश के पहाड़ी इलाके में स्थित एक विश्वविद्यालय
है। जहाँ देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र आकर पढ़ते हैं। कथानायक राहुल उन्हीं में
से एक छात्र है जो कि वहाँ अन्थ्रोपोलोजी पढ़ने आया है तथा टैगोर हॉस्टल के कमरा नम्बर
252 में रहता है। हॉस्टल में छात्रों को स्थानीय गुंडे परेशान करते हैं। शिकायत करने
के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती; क्योंकि उन्हें स्थानीय नेताओं और बड़े
पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त होता है। उनकी उपद्रताओं के कारण असम का छात्र सापाम
तोंबा आत्महत्या कर लेता है लेकिन फिर भी उन गुंडों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है।
राहुल कॉलेज में अंजलि नाम की लड़की से प्रेम
करने लगता है। वह हिंदी विभाग में एमए कर रही है। उसके कारण वह भी एमए अन्थ्रोपोलोजी
छोड़ कर एमए हिंदी में दाखिला ले लेता है। वहाँ विभाग में
ब्राह्मणवाद का सामना करता है। हिंदी विभाग में 18 में से 15 छात्र ब्राह्मण व 16 अध्यापकों
में से 13 ब्राह्मण होते हैं। राहुल जिस लड़की से प्यार करता है वह भी ब्राह्मण है तथा
उसके पिता मिनिस्टर है। राहुल ब्राह्मणवाद व राजनीति के इस कुचक्र का निशाना बन जाता
है।
राहुल एक सजग
पात्र है। जो अपने आस-पास हो रही घटनाओं और राजनीति के चलते हो रहे मूल्यों के ह्रास
का विश्लेषण करता है लेकिन उसके खिलाफ़ कुछ भी कर पाने में असमर्थ है।
“आश्चर्य यह था कि टेलीविजन और अख़बार में सिर्फ़ शेयर बाज़ार के मूल्य सूचकांक का उतार-चढ़ाव
दिखाया जा रहा था, वह विघटन और हिंसक टकराहटें नहीं, जो लगातार जारी थीं- चारों ओर।
यह उपन्यास हर सजग नागरिक को वर्णागत
रूढ़ि, संकुचित राष्ट्रीयता तथा शिक्षण व्यवस्था की राजनीति को समझने के लिये पढ़ना चाहिए।
यह कोई गंभीर उपन्यास नहीं है जिसमें केवल विचार ही विचार हों। वरन् एक सरल व जीवन्त
उपन्यास है, जहाँ कॉलेज का वातावरण है, दोस्तों की चुहल है, राहुल-अंजलि का प्रेम है,
पीली छतरी है जो पहले तितली थी। तितली छतरी में बदल जाती है और छतरी तितली में बदलकर
उड़ जाती है।
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